Monday, 27 April 2020

विकट परथति में डॉक्टरों पर जानलेवा हमले क्यों

  लेखक संजय कुमार गिरि

देश में इस विकट समस्या से आज हर नागरिक जूझ रहा है और न चाहते हुए भी अपने को अपने परिवार सहित घर में बंद कर रखा है ।ये सही भी है अगर इस परस्थिति में जरा भी लापरवाही हुई नहीं कि इस बीमारी की चपेट में आ जाएं ।विपरीत से विपरीत परिस्थति में भी इंसान को अपना संतुलन नही खोना चाहिए और किसी भी समस्या का सामना करने का धैर्य और साहस इंसान के अंदर होना ही चाहिए  , संघर्ष करना और पराजय को कभी भी स्वीकार ना करना एक सैनिक और एक चिकित्सक का परम कर्तव्य होता है ।जिस प्रकार एक सैनिक सरहद पर रहकर अपनी अंतिम सांस तक दुश्मनों से लड़ता रहता है और कभी हार नहीं मानता उसी प्रकार एक डॉक्टर देश के अंदर हर बीमारी का डटकर मुकाबला करता है और मरीज का इलाज करता है । मित्रों देश में कोरोना वायरस नामकी इस बीमारी का घोर संकट छाया हुआ है और हर नागरिक इससे त्रस्त है ।
ओर अगर ऐसे में हम डॉक्टर पर ही जान लेवा हमला कर दें तो इससे बुरा देश में भला ओर क्या हो सकता है ।डॉक्टर आज हमारे लिए एक वरदान बनकर हमारे साथ खड़े हैं और अपनी जान की परवाह किये बिना ही हमारे प्राणों की रक्षा खातिर इस कोरोना बीमारी से निरंतर  जूझ रहे जो तारीफे काबिल है ।
आज पूरे देश में राज्य सरकारों ने लोकड़ाऊंन किया हुआ है सभी लोग इस बीमारी से स्वयम को बचाने के लिए अपने घरों में अपने परिवार के साथ बैठे हुए हैं ।क्या किसी कंपनी का मालिक और क्या कोई साधरण से कर्मचारी सभी लोग सरकार के साथ खड़े दिखलाई दे रहे हैं ओर ऐसे में कुछ उपदरई लोग अपने इलाके में आये डाक्टरों की टीम एवम पेरामिल्ट्री पर जान लेवा हमले कर रहे हैं वो बहुत ही निंदनीय है ।सरकार ओर प्रशासन को इन पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए और ऐसे लोगों को कड़े से कड़ा दंड देना चाहिए ।ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को भी चाहिए कि वे ऐसे लोगों का विरोध कर डाक्टरों की रक्षा खातिर सामने आना चाहिऐ ।यही एक देशभक्त का परम कर्तव्य भी है ।
संजय कुमार गिरि
विकट परथति में डॉक्टरों पर जानलेवा हमले क्यों

  लेखक संजय कुमार गिरि

देश में इस विकट समस्या से आज हर नागरिक जूझ रहा है और न चाहते हुए भी अपने को अपने परिवार सहित घर में बंद कर रखा है ।ये सही भी है अगर इस परस्थिति में जरा भी लापरवाही हुई नहीं कि इस बीमारी की चपेट में आ जाएं ।विपरीत से विपरीत परिस्थति में भी इंसान को अपना संतुलन नही खोना चाहिए और किसी भी समस्या का सामना करने का धैर्य और साहस इंसान के अंदर होना ही चाहिए  , संघर्ष करना और पराजय को कभी भी स्वीकार ना करना एक सैनिक और एक चिकित्सक का परम कर्तव्य होता है ।जिस प्रकार एक सैनिक सरहद पर रहकर अपनी अंतिम सांस तक दुश्मनों से लड़ता रहता है और कभी हार नहीं मानता उसी प्रकार एक डॉक्टर देश के अंदर हर बीमारी का डटकर मुकाबला करता है और मरीज का इलाज करता है । मित्रों देश में कोरोना वायरस नामकी इस बीमारी का घोर संकट छाया हुआ है और हर नागरिक इससे त्रस्त है ।
ओर अगर ऐसे में हम डॉक्टर पर ही जान लेवा हमला कर दें तो इससे बुरा देश में भला ओर क्या हो सकता है ।डॉक्टर आज हमारे लिए एक वरदान बनकर हमारे साथ खड़े हैं और अपनी जान की परवाह किये बिना ही हमारे प्राणों की रक्षा खातिर इस कोरोना बीमारी से निरंतर  जूझ रहे जो तारीफे काबिल है ।
आज पूरे देश में राज्य सरकारों ने लोकड़ाऊंन किया हुआ है सभी लोग इस बीमारी से स्वयम को बचाने के लिए अपने घरों में अपने परिवार के साथ बैठे हुए हैं ।क्या किसी कंपनी का मालिक और क्या कोई साधरण से कर्मचारी सभी लोग सरकार के साथ खड़े दिखलाई दे रहे हैं ओर ऐसे में कुछ उपदरई लोग अपने इलाके में आये डाक्टरों की टीम एवम पेरामिल्ट्री पर जान लेवा हमले कर रहे हैं वो बहुत ही निंदनीय है ।सरकार ओर प्रशासन को इन पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए और ऐसे लोगों को कड़े से कड़ा दंड देना चाहिए ।ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को भी चाहिए कि वे ऐसे लोगों का विरोध कर डाक्टरों की रक्षा खातिर सामने आना चाहिऐ ।यही एक देशभक्त का परम कर्तव्य भी है ।
संजय कुमार गिरि

Friday, 4 October 2019

प्रसिद्धि कवियत्री श्रीमती पुष्प लता सिंह द्वारा रचित चार पुस्तकों मन का बोझ (उपन्यास)बिखरते रिश्ते(कहानी संग्रह) हर राह सूनी (काव्य संग्रह)अंधेरों से दूर (काव्य संग्रह) का लोकार्पण हिंदी भवन आई टी ओ नई दिल्ली में देश के जाने माने प्रसिद्ध साहित्यकारों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर पद्मश्री श्री रमाकांत शुक्ल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि के रूप में आकाशवाणी दिल्ली के सेवानिवृत्त उप महानिदेशक श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने कार्यक्रम की शोभा बढायी।कवि डॉ प्रवीण शुक्ल जी, डॉ अशोक मधुप , डॉ ओमप्रकाश प्रजापति ,श्री जगदीश मीणा , श्रीमती ममता किरण ,डॉ महेंद्र शर्मा मधुकर ने वशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर दूर दूर से आये कवि व कवित्रियों ने श्रीमती पुष्प लता को अपनी शुभकामनाएं दी एवम अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से वातावरण को भावविभोर कर दिया।कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कीर्ति रतन जी ने बहुत शानदार अंदाज़ में किया।
संजय कुमार गिरि


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14 एवं 15 सितंबर (2019 को इंद्रप्रस्थ लिटरेचर फेस्टिवल का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन नई दिल्ली के हिंदी भवन में आयोजित किया गया जिसमें मुझे चित्रकारिता के लिए सम्मानित किया गया।
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नवांकुर साहित्य सभा का सप्तम पुस्तक लोकार्पण इंडिया हेबिटेट सैंटर, लोधी रोड में सम्पन्न हुआ इस संकलन में 16 नवांकुरों की रचनाएं प्रकाशित हुईं I इस सुअवसर पर नवांकुर साहित्य सभा के सभी कार्यकारणी के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया ,जिसमें मुझे भी सम्मानित किया गया हार्दिक आभार आदरणीय अशोक कश्यप जी का I
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Tuesday, 1 October 2019

आज 29  सितम्बर को शानदार एपिसोड शूट हुए JK24x 7news के चर्चित शो 'अर्ज़ किया है’ में ।आज के एपिसोड में हमने नवरात्रों की शुभकानाओं के साथ काव्य पाठ किया मेरे साथ पहले एपिसोड में रहे
Sumit Singh
Manisha Saxena
Ashish Prakash
और आपका मित्र संजय कुमार गिरि
साथ रहे हरफन मौला एंकर शायर #abdulnabi hasan जी
हार्दिक आभार आदरणीया मस्कान जी और आशीष भाई ।

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Saturday, 24 August 2019

आज 11 अगस्त, की शाम बहुत ही खास रही जिन कवियों को हम हिंदुस्तान के बड़े बड़े मंचों पर सुनते आ रहे थे आज उनके साथ काव्य पाठ करने का सुअवसर प्राप्त हुआ ।मुखौटा आर्ट्स गैलरी, शाहदरा में सरला नारायन ट्रस्ट द्वारा आयोजित कोंपल' की प्रथम गोष्ठी सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई जहां परमादरणीय डॉ विष्णु सक्सेना जी ,आदरणीय अरुण जैमिनी जी ,आदरणीय चिराग जैन जी का सानिध्य हमे मिला !


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हास्य कवि आदरणीय अरुण जैमिनी जी को उनका पेंसिल स्केच भेंट करते हुए संजय कुमार गिरि सानिध्य रहा आदरणीय डॉ विष्णु सक्सेना जी का
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परम आदरणीय डॉ विष्णु सक्सेना जी को उनका पेंसिल स्केच भेंट करते हुए संजय कुमार गिरि
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आज 14अगस्त को महफ़िल ऐ तहज़ीब उर्दू चेंनल पर आज़ादी ऐ ज़श्न मुशायरा में शिरकत हुई ,जिसका टेलीकास्ट 15 अगस्त को होना मुकर्रर हुआ है ।
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डी. आर.डी.ओ. में शानदार कवि सम्मेलन
सजंय कुमार गिरि ,नई दिल्ली
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन मुख्यालय, (डी. आर.डी.ओ.), राजाजी मार्ग में राजभाषा निदेशालय द्वारा हिंदी पखवाड़ा उद्घाटन शुभारम्भ एवं कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें हिन्दी प्रचार प्रसार पर बल देते हुए राजभाषा के निदेशक सुनील शर्मा ने अपने विचार प्रकट किये। उससे पहले सह निर्देशक बाबु लाल ,डॉ जे.पी.सिंह ,आशा त्रिपाठी एवं अन्य अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्जवलित किये गये।सरस्वती वंदना वाणी पुत्र इन्द्र जीत सुकुमार ने अपने मधुर कंठ से की ,सुनील शर्मा ने कवियों को शॉल ओढ़ा कर एवं पुष्प भेंट कर सभी आमंत्रित कवियों का स्वागत एवम सम्मान किया। जिनमें शामिल थे डॉ चेतन आनन्द, डॉ इन्द्रजीत सुकमार, डॉ मनोज कामदेव, संजय गिरि,,जगदीश मीणा, ममता लड़ीवाल एवं शोभा सचान ! मंच का शानदार संचालन ममता लड़ीवाल एव एस.के.मेहता ने किया। अंत में सभी कवियों को डी आर डी ओ की तरफ से समृत्ति चिन्ह भेंट किये गए।कवि सम्मेलन का समापन राष्ट्र गान के साथ हुआ I
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16 अगस्त को आकाशवाणी भवन, दिल्ली में... news देते रिकोर्डिंग हुई यह मेरा तीसरा अवसर रहा --
दिल्ली/NCR की साप्ताहिक साहित्यिक गतिविधियों(11 अगस्त से 17 अगस्त ) पर रिपोर्ट पढते हुए l इसे 18 अगस्त सुबह 7.30 बजे आकाशवाणी दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ चैनल 366.3 मीटर अर्थात 819 किलो. पर सुना जा सकेगा ।
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"मेंहदी लगा के हाथों पे रोई थी ज़ार-ज़ार
अब हँस रही हूँ पाँव की ज़ंजीर देखकर"
जैसे मार्मिक शे'र कहने वाली आशती तूबा की स्मृति शेष को समर्पित ग़ज़ल गोष्ठी
सीनियर सिटीजन्स एसोसिएशन, ग़ाज़ियाबाद और बसंत चौधरी फ़ाउंडेशन, नेपाल के संयुक्त तत्वावधान में कवि नगर,ग़ाज़ियाबाद में आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर श्री विजेंद्र परवाज़ ने की। उद्घाटन डॉ. कुँअर बेचैन जी ने किया। राज्यसभा सदस्य श्री अनिल अग्रवाल,उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री श्री अतुल गर्ग,वरिष्ठ कवि श्री कृष्ण मित्र,सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राजकुमार भाटी,डा.अतुल जैन,श्री सुनील सिंघल एवम श्री आलोक यात्री विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रख्यात शायर दीक्षित दनकौरी के कुशल संचालन में गोविन्द गुलशन,मासूम ग़ाज़ियाबादी,उत्कर्ष ग़ाफ़िल,अब्दुल रहमान मंसूर,सालिब चंदयानवी,ऐन मीम कौसर,चेतन आनंद,राज कौशिक,अंजु जैन,मनोज अबोध,अशोक पंकज,राजीव सिंहल,डा.तारा गुप्ता,,डा.श्वेता सिंह,नंदिनी हर्ष,गुरचरन मेहता सहित एनसीआर के लगभग 50 शायरों ने अपने-अपने कलाम से गाज़ियाबाद के सैकड़ों प्रबुद्ध श्रोताओं का दिल जीत लिया। यू ट्यूब चैनल 'एक्सपोज़ इंडिया' द्वारा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। श्री सतीश बिंदल ने सभी अतिथियों,श्रोताओं,शायरों एवम उपस्थित मीडिया कर्मियों का स्वागत एवम आभार व्यक्त किया।
(भाई मनोज अबोध जी की सुंदर वाल से कॉपी पेस्ट)
आशती तूबा की स्मृति शेष को समर्पित जनाब दीक्षित दनकौरी जी के संयोजन में ग़ज़ल गोष्ठी में अपना कलाम पढ़ते आप सभी का मित्र संजय कुमार गिरि ।
सभी चित्र जगदीश मीणा जी द्वारा ।
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 उर्दू अकादमी, दिल्ली-नये पुराने चिराग़
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उर्दू अकादमी, दिल्ली द्वारा क़मर रईस आडीटोरियम, सीपीओ बिल्डिंग, कश्मीरी गेट, दिल्ली में दिनाँक 21 से 25 अगस्त, 2019 तक आयोजित होने वाले पाँच दिवसीय "लिटरेरी एण्ड पोयटिक मीट" के तहत "नये पुराने चिराग़" शे'री नशस्ति में दूसरे दिन आज गुरुवार 22 अगस्त, 2019 को देश वरिष्ठ शायर सद्रे-मोहतरम जनाब डॉ. जी. आर. कमल की सदारत तथा नाज़िमे-मुशायरा मशहूरो-मारूफ़ शायर जनाब एज़ाज़ अन्सारी की बेहतरीन निज़ामत में मुशायरा पढ़ने का मौका हासिल हुआ।
बहुत बहुत शुक्रिया उर्दू अकादमी, दिल्ली।
संजय कुमार गिरि

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Friday, 12 July 2019

भारत में सभी को समानता का अधिकार नहीं है सभी को समान शिक्षा का अधिकार तो बिल्कुल भी नहीं हैं ,सभी को समानता से रहने का अधिकार भी नहीं है , मोदी जी शायद इस ओर भी कुछ ध्यान देंगे । ऐसा विश्वास करने का प्रयास कर रहा हूँ ।
संजय कुमार गिरि

Friday, 21 June 2019

लघुकथा -5
मासूम बच्चे
साहब बिहार में नन्हें और मासूम बच्चों की मरने की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है ,आप कहें तो कल आप का एक दौरा बिहार में बच्चों को देखने का फिक्स कर डायरी में नोट कर लूं ,असिस्टेंट ने मंत्री जी से पूछा ।
मंत्री : अरे पगला गए हो का ,कल विश्व योग दिवस है , लाखों लोग कल योग करने सुबह इंडिया गेट पर आयेगा ,सबसे मिलना जुलना भी होगा और इससे हमरा वोट बेंक भी बढ़ेगा ,कल योग में शामिल होने जाना है।सुबह जल्दी जगा देना I
और फिर नेता जी खांसते और हांफते हुए अपने बेड रूम में सोने चल दिये ।
संजय कुमार गिरि

Friday, 24 May 2019

लघु कथा -4
लघु कथा बहादुर कुत्ता
गली का हर कुत्ता मुझे पहचानता है ,मेरे गली में कदम रखते ही सभी कुत्ते एक सुर में गाने लगतें हैं और मेरे पास आ मुझे घेरकर गोल- गोल चक्कर काटने लग जाते हैं । आज उन कुत्तो में से एक कुत्ता नदारत था। मुझे बेचैनी सी हो रही थी उसे लेकर । घर पहुँचकर हाथ-मुँह धोकर मैं अपने कमरे में आया और न्यूज़ देखने लगा।
न्यूज़ में देखा की हमारी ही गली केें एक घर में कुछ बदमाश लूट की वारदात करने आये थे पर वे अपने मनसूबे में सफल न हो सके ओर उन्हें भागना पड़ा। इस सब का कारण वह कुत्ता ही था .उसने ठीक समय पर भौंकना शुरू कर दिया था जिसके कारण उन बदमाशों को भागना पड़ा। लेकिन जाते हुए बदमाशों ने उस कुत्ते को अपनी खीझ में गोली मार दी थी।
आज उस कुत्ते की वजह से एक परिवार लूटने और उजड़ने से बच गया था। बाकी रह गई थी तो कुत्ते की कुर्बानी । पर यहाँ तो लोग शहीदों की कुर्बानी नहीं समझते कुत्ते की क्या बिसात ।
अगली सुबह लोग चोरों की चर्चा खूब चटखारे लेकर कर रहे थे । कुत्ता उनके लिए गौण था । उनकी नज़रों में तो वह एक कुत्ता ही था भला उसका क्या मोल।
बड़ी मस्कत से उन बदमाशों में एक को पकड़ लिया था पुलिस ने । किन्तु ,बहादुर कुत्ते का न कोई केस लड़ेगा न उसे न्याय मिलेगा ....हाँ, यहाँ बहादुर कुत्तों के लिए कभी कुछ नहीं होता ।
संजय कुमार गिरि
लघु कथा -3
* अनाथ *
मैं किसी काम से बाजार जा रहा था के रास्ते में मैंने देखा कुछ युवक एक युवती को छेड़ रहे थे यह मुझसे देखा न गया और मैं उस युवती की मद्दत करने आगे बढ़ा और उन बदमाशों को डांटने लगा ,उनके साथ बहस ज्यादा बढ़ गई और उन बदमाशो में से एक ने अचानक ही मुझे चाकू मार दिया और सभी वहां से भाग लिए । मैं अचेआवस्था में पड़ा रहा और लोग आ -जा रहे थे पर किसी को भी इतना वक्त नहीं की मुझे देख सके और मुझे किसी नजदीकी अस्पताल पहुँचा सके ।इतने में ही मैंने देखा कि एक गरीब व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 55 - 60 के आस -पास रही होगी ,मुझे अपने कंधो पे ड़ाल अस्पताल कि ऒर चल पड़ा ।
.अस्पताल पहुँच कर उसने मुझे आपात -कालीन वार्ड में एडमिट करा दिया और मेरी देखभाल कि खातिर रात भर वहीं रुका ।मेरी देखभाल करने में उस ने कोई कसर नहीं छोड़ी .सुबह होते ही वह मेरे लिए चाय और बिस्कुट ले आया और मेरी और बढ़ाते हुए उसने कहा लो बेटा नास्ता कर लो ।उसके मुँह से अपने को बेटा शब्द सुनते ही मेरी आँखों से आँसू बह निकले ,आज तक मुझ अनाथ को किसी ने भी बेटा कह कर नहीं बुलाया था ,मेरे बहते हुए आँसूओं को देख कर वह बूढ़ा व्यक्ति बोला,बेटा रोते क्यों हो क्या दर्द ज्यादा हो रहा है. रुको मै डॉक्टर को बुला लाता हूँ ।मैंने उन्हें रोकते हुए कहा नहीं बाबा ये दर्द मेरे ज़ख्मों का नहीं बल्कि ज़माने द्वारा दिए तानो व् गलियों का है ।.आज तक किसी ने भी मुझे बेटा कह कर नहीं पुकारा ,था सभी ने मुझे कभी छोटू ,छोकरे तो कभी लोंडे या हरामी के नाम से पुकारा था , आप ही वो पहले शक्स हैं जिसने मुझे बेटा कहा है ।.मेरी बात सुनकर वह बूढ़ा व्यक्ति भी रो पढ़ा और मुझे अपने गले लगा लिया और बोला बेटा मैं भी तुम्हारी ही तरह अनाथ हूँ मेरा भी इस दुनिया में कोई नहीं है ।
हम दोनों ने अब एक दुसरे को सम्भाला और हॉस्पिटल से छुट्टी ले कर अपने गन्तव्य कि ओर चल पड़े ,एक दुसरे कि बांह पकडे ,अब हम अनाथ नहीं थे ।
*संजय कुमार गिरि
9871021856

Wednesday, 22 May 2019

लघु कथा -2
अनमोल गिफ्ट
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वह मेरे पसीने में भीगे कपड़ों को देखकर ऐसे नाक भों सिकोड़ रहा था जैसे कि मैं किसी दूसरे ग्रह का प्राणी हूँ, शायद उसे मेरे पसीने की दुर्गंध आ रही थी । किन्तु मैं क्या करता दिनभर धूप में जी तोड़ मेहनत करता रहा था ,कभी इधर तो कभी उधर सामान लेकर जाना पड़ रहा था। उस पर साहेब का गुस्सा ,जैसे तैसे मैं अपना काम निपटा कर ऑफिस से जल्दी घर निकलना चाहता था । सुबह ही पत्नी से वादा जो किया था कि 20 वीं सालगिरह है, आज किसी रेस्टोरेंट चलेंगे डिनर करने ।
पर काम की वजह से आज भी भाग दौड़ रोज की तरह बनी रही । 7 बजे फ्री होते ही मेट्रो पकड़ी और घर को चल दिया था ।मेरे बगल में ही एक सूट बूट पहने व्यक्ति मुझे पसीने में देख अजीब-सी नजरों से घूरे जा रहा था ।मैं भी अपनी जगह-जगह से घिस चुकी कमीज को उसकी नजरों से बचाता संकोच वश अपने को सिकोड़े गेट के शीशे के पास खड़ा शर्मिंदगी महसूस कर रहा था ।
कश्मेरी गेट मेट्रो स्टेशन से बाहर को निकला तो ताजी हवा में थोड़ा सुकून मिला । देर होने के कारण मार्केट बंद हो गई थी और मैं पत्नी के लिए कोई गिफ्ट न ले सका ।अनमने मन से जल्दी में ऑटो पकड़ घर की ओर चल दिया । घर पहुँचते पहुँचते रात्रि के 10 बज चुके थे और पत्नी दरवाजे पर खड़ी बेसब्री से मेरी राह ताक रही थी ।
"सॉरी यार , मैं काम कि वजह से तुम्हारे लिए कोई गिफ्ट नहीं ला सका ।" मैं बहुत ही अजीब महसूस कर रहा था ।
उसने जैसे कुछ सुना ही नहीं था । वह मुजसे लिपट गई ।
"ये क्या जरूरी है कि हर बार तुम ही मुझे गिफ्ट दो ।" मुझे एक पैकेट पकड़ाते हुए मैरिज एनिवर्सरी की बधाई दी ।मैंने पैकेट खोलकर देखा तो दंग रह गया उसमें एक पिंक शर्ट और ब्लैक पेंट थे।
"सही कहती हो ...तुम्हारी पसंद बहुत अच्छी है ।"
"सो तो है ...तुम्हें जो पसंद किया है ।" वह मुस्कुराते हुए बोली । पत्नी को मालों था कि पसीने की खुशबू क्या होती है ।
संजय कुमार गिरि

विकट परथति में डॉक्टरों पर जानलेवा हमले क्यों   लेखक संजय कुमार गिरि देश में इस विकट समस्या से आज हर नागरिक जूझ रहा है और न चाहते हुए भ...