Monday, 20 August 2018

अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में काव्य संध्या 

संजय कुमार गिरि 
नई दिल्ली ,पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर वक्ता , साहित्यकार भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में क्रिस्टल पैलेस होटल वसुंधरा ग़ाज़ियाबाद में एक श्रद्धांजलि सभा और काव्य संध्या का आयोजन अखिल भारतीय साहित्य परिषद ग़ाज़ियाबाद द्वारा 
किया गया जिसके संयोजक गाज़ियाबाद के प्रसिद्ध कवि चेंतन आनंद थे । अटल जी को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की गई। काव्य संध्या की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद ग़ाज़ियाबाद की अध्यक्ष श्रीमती मीरा शलभ ने की। मंच का शानदार संचालन सुपरिचित कवयित्री सुश्री ममता लड़ीवाल ने अपने लाजबाब अंदाज़ में किया। l तीन दर्जन से अधिक कवि एवं कवियत्रियों ने अपना शानदार काव्य पाठ कर श्र्ध्य अटल जी को आपकी काव्यांजलि समर्पित की। कार्यक्रम का सुन्दर संयोजन ग्लोबल वैश्य समाज और अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने संयुक्त रूप से किया।








Sunday, 19 August 2018

विश्व फोटोग्राफी दिवस पर मेरी खुदी से ली हुई मेरी पसंदीदा तस्वीर

Friday, 18 May 2018

आज दिनांक 19 मई के Red handed daily में मेरी एक ग़ज़ल प्रकाशित हुई हार्दिक आभार महताब खान साहब 

Wednesday, 16 May 2018

कार्तिक को स्काउट में मिला गोल्ड मैडल की खबर आज  स्वैच्छिक दुनिया में प्रकाशित हुई 



आज एक ग़ज़ल स्वैच्छिक दुनिया में प्रकाशित हुई

Monday, 14 May 2018

कार्तिक को स्काउट में मिला गोल्ड मैडल की खबर आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से मयूर संवाद में प्रकाशित हुई 

Saturday, 12 May 2018

शीर्षक " माँ " पर कुछ कवि एवं साहित्यकारों के रचनात्मक विचार 
माँ के क़दमों में है जन्नत ये बताने वाले
मुझको लगता है कि जन्नत से वो आगे न गए
दीक्षित दनकौरी  
2-
जीवन के हर मोड़ पर, छले गए हर बार। 
मां की ममता साथ थी,हार गया संसार।।
सरिता गुप्ता
दिल्ली
3-
माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार।
माँ बिन जीवन लाल का,समझो है बेकार।।
लाल बिहारी लाल
4--
रहे खुद भूखी फिर भी , दे पेट भर खाना |
भाव है उसका ऐसा ,खिला खुश हो जाना ||
संजय वर्मा "दृष्टि" मनावर 
5-
हर धर्म की माँ ओ के ,ममता के एक रूप |
आँचल से ढांक देती ,जब सर पर हो धूप|| 
संजय वर्मा "दृष्टि" मनावर 
6--
मैं घंटे बतियाता हूं माँ की कब्र से,
एै "रंग"--एैसा लगता है की जैसे,
माँ की कब्र से भी
अपने बेटे को दुआ आती है।
रंगनाथ द्विवेदी।
7--
माँ के कदमो में रहूँ, टूटे सभी गुरूर !
माँ ममता की छाव से , कभी न रखना दूर !!
कृष्णा नन्द तिवारी 
8--
माँ से ही संसार है,माँ ही ममता रूप।
देती सबको छाँव है,खुद सहती है धूप।।
मनोज कामदेव
9--
जाकर छत पर देखता ,चंदा तारे रोज ।
माँ उसको मिलती नहीं ,बालक करता खोज ।।
संजय कुमार गिरि
10--
मांग लूं यह मन्नत ,फिर यही जहाँ मिले 
फिर यही गोद मिले , फिर यही माँ मिले 
माधवी राठी 
11--
सुख-दुख दोनों में रहे, कोमल और उदार।
कैसी भी सन्तान हो, माँ देती है प्यार।।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक
12-
'मां ही पहली गुरू है, मां है तीरथ धाम,
कौशल्या- आशीष से, राम हो गये राम।
राधेश्याम बन्धु
प्रस्तुति :***शायर एक शायरी अनेक ***
संकलन कर्ता   :-संजय कुमार गिरि , 

विकट परथति में डॉक्टरों पर जानलेवा हमले क्यों   लेखक संजय कुमार गिरि देश में इस विकट समस्या से आज हर नागरिक जूझ रहा है और न चाहते हुए भ...