Friday, 8 March 2019
Wednesday, 6 March 2019
संजय कुमार गिरि को 'कवितालोक आदित्य- 2019' सम्मान से विभूषित किया
संजय कुमार गिरि ,बिजनौर, अखिल भारतीय साहित्यिक संस्था 'कवितालोक' का त्रिशतकीय महाकुंभ में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों ,कवि एवं कवियत्रियों ने अपनी पावन उपस्थति दर्ज करवाई ,इस सुअवसर पर प्रख्यात गीतिकाकार मनोज मानव की दो काव्य कृतियों 'गीतिकामृत' और 'छंदानुगामिनी' का लोकार्पण भी किया गया। इसके साथ ही एक अखिल भारतीय कविसम्मेलन का आयोजन भी किया गया जिसमें देश के कोने-कोने से आये लगभग 93 साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं पढ़ी एवं उन्हें सम्मान पत्र ,अंगवस्त्र और दोनों पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली के प्रसिद्ध चित्रकार संजय कुमार गिरि को 'कवितालोक आदित्य- 2019' सम्मान से विभूषित किया गया !
इस अवसर पर दिल्ली के प्रसिद्ध चित्रकार संजय कुमार गिरि ने हमेशा की तरह इस बार भी तीन साहित्यकारों को उनके बनायें पेन्सिल स्केच उन्हें भेंट किये जिनमें आचार्य ओम नीरव जी ,लव कुमार प्रणय जी और अनमोल शुक्ल आन्मोल रहे ,अनमोल शुक्ल जी के किसी वजह से ना आने पर उनका पेन्सिल स्केच उनके शिष्य मनोज मानव ने लिया I
इस अवसर पर दिल्ली के प्रसिद्ध चित्रकार संजय कुमार गिरि ने हमेशा की तरह इस बार भी तीन साहित्यकारों को उनके बनायें पेन्सिल स्केच उन्हें भेंट किये जिनमें आचार्य ओम नीरव जी ,लव कुमार प्रणय जी और अनमोल शुक्ल आन्मोल रहे ,अनमोल शुक्ल जी के किसी वजह से ना आने पर उनका पेन्सिल स्केच उनके शिष्य मनोज मानव ने लिया I
Wednesday, 27 February 2019
ऋषियों की पावन भूमि पर,
जिस दुश्मन ने पाँव पसारा है !
सर धड से अलग कर देंगे हम,
जिस दुश्मन ने हमें ललकारा है !!
बहुत सुन चुके धमकी उसकी,
अब तो रक्त उसका बहाना है !
जान देकर अपनी वतन पर ,
पाकिस्तान में तिरंगा फेहराना है !!
हद को पार करता है जब वो ,
खून हमारा खोल जाता है !
युद्ध की हुंकार भरते हैं हम जब ,
फिर वो जड़ से दहल जाता है !!
हर बार की ललकार का उसको ,
इस बार सबक सिखाना है !
सर काट कर के आज दुश्मन का ,
माँ भवानी को बलि चढ़ाना है !!
संजय कुमार गिरि
Tuesday, 19 February 2019
छंद
1
धरती अरु आकाश हैं ,पंचतत्व का भाग
वायु अग्नि ये जल सभी, हैं इनके सम्भाग
हैं इनके सम्भाग ,न इन बिन जीवन चहके
हरा भरा हर बाग़ ,यहाँ चन्दन सा महके
कह संजय कविराय ,कष्ट ये सारे हरती
देती जीवन दान ,हमारी पावन धरती
संजय कुमार गिरि
2.
फगुवा की रीत चली , मनवा में प्रीत पली
होरी में गोपाल सँग खेल रहीं गोपियाँ।
गोरे गोरे गालन पे, मलते गुलाल श्याम,
नोक-झोंक गोपिन की झेल रहीं गोपियाँ।।
देख पिचकारी भरी ,गोपीन पे भारी पड़ी ।
कान्हा को पीछे पीछे ,ठेल रही गोपियाँ ।।
मन में उदार लिये ,होरी की फुआर लिए ।
हाथों में हाथ डार के ,मेल रही गोपियाँ।।
संजय कुमार गिरि
3.
जिन्दगी है चार दिन ,
कटे नहीं यार बिन !
ऐसी जिन्दगी को तुम, प्यार से संवार दो !
भेद भाव आये नहीं !
घृणा भी समाये नहीं !
ऐसे दोसतों के संग,जिन्दगी गुजार दो !
साम ,दाम भेद लिए
व्हिस्की और रम पिए
ऐसे दोसतों को तुम ,झाड़ू से बुआर दो !!
--संजय कुमार गिरि
4
1
धरती अरु आकाश हैं ,पंचतत्व का भाग
वायु अग्नि ये जल सभी, हैं इनके सम्भाग
हैं इनके सम्भाग ,न इन बिन जीवन चहके
हरा भरा हर बाग़ ,यहाँ चन्दन सा महके
कह संजय कविराय ,कष्ट ये सारे हरती
देती जीवन दान ,हमारी पावन धरती
संजय कुमार गिरि
2.
फगुवा की रीत चली , मनवा में प्रीत पली
होरी में गोपाल सँग खेल रहीं गोपियाँ।
गोरे गोरे गालन पे, मलते गुलाल श्याम,
नोक-झोंक गोपिन की झेल रहीं गोपियाँ।।
देख पिचकारी भरी ,गोपीन पे भारी पड़ी ।
कान्हा को पीछे पीछे ,ठेल रही गोपियाँ ।।
मन में उदार लिये ,होरी की फुआर लिए ।
हाथों में हाथ डार के ,मेल रही गोपियाँ।।
संजय कुमार गिरि
3.
जिन्दगी है चार दिन ,
कटे नहीं यार बिन !
ऐसी जिन्दगी को तुम, प्यार से संवार दो !
भेद भाव आये नहीं !
घृणा भी समाये नहीं !
ऐसे दोसतों के संग,जिन्दगी गुजार दो !
साम ,दाम भेद लिए
व्हिस्की और रम पिए
ऐसे दोसतों को तुम ,झाड़ू से बुआर दो !!
--संजय कुमार गिरि
4
भारती के लाडलों ने ,भारती की रक्षा हेतु
दुश्मनों से लड़कर ,जान ये गवाई है ।
आन वान शान हेतु ,तिरंगे के मान हेतु
सीने पर खाके गोली ,वीर गति पाई है
जन गण मन गाके ,रूखा सूखा अन्न खाके
वीर सपूतों की कहानी बन के छाई है
बहनों की मांग सूनी ,माताओं की गोद सूनी
तब जाके भारत में ,आज़ादी ये आई है
दुश्मनों से लड़कर ,जान ये गवाई है ।
आन वान शान हेतु ,तिरंगे के मान हेतु
सीने पर खाके गोली ,वीर गति पाई है
जन गण मन गाके ,रूखा सूखा अन्न खाके
वीर सपूतों की कहानी बन के छाई है
बहनों की मांग सूनी ,माताओं की गोद सूनी
तब जाके भारत में ,आज़ादी ये आई है
संजय कुमार गिरि
5.
आर करो पार करो ,दोषियों पे वार करो
जाकर लाहौर अब,गाड़ आओ ये झंडा
बड़े-बड़े बम फेको ,उनके ही घर ठोको
बचने ना कोई पाए , एक अब दरिंदा
घात पे वो घात करे ,विष वाली बात करे ,
मौत के सौदागरों का,वो करते हैं धन्दा
झुकने ना कभी पाए ,जान भले चली जाए
अपने वतन की है ,पहचान तिरंगा
संजय कुमार गिरि
5.
आर करो पार करो ,दोषियों पे वार करो
जाकर लाहौर अब,गाड़ आओ ये झंडा
बड़े-बड़े बम फेको ,उनके ही घर ठोको
बचने ना कोई पाए , एक अब दरिंदा
घात पे वो घात करे ,विष वाली बात करे ,
मौत के सौदागरों का,वो करते हैं धन्दा
झुकने ना कभी पाए ,जान भले चली जाए
अपने वतन की है ,पहचान तिरंगा
संजय कुमार गिरि
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देश के सबसे बड़े ग़ज़ल कुम्भ 2018 में दूसरी बार 14 जनवरी को सिरकत करने का अवसर प्राप्त हुआ .हार्दिक आभार आदरणीय दीक्षित दनकौरी जी का,
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देश का प्रसिद्ध ग़ज़ल कुम्भ 2019 सम्पन्न हुआ संजय कुमार गिरि ,नई दिल्ली , अंजुमन फ़रोग़-ए-उर्दू,(रजि.) दिल्ली के तत्वाधान में ,बसंत चौधरी...














